इव्हिएम घोटाला; संवैधानिक मुल्योपर हमला

लंदन में चल रही हैकथॉन में अमेरिकी साइबर एक्सपर्ट सैयद सूजा ने दावा किया है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के साथ गड़बड़ी की गई थी और बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक करने के बारे में जानकारी रखते थे। साथ में उसने ये भी दावा किया है कि मुंडे की ‘हत्या’ हुई है।
– एक्सपर्ट ने दावा किया कि इस मशीन को ब्लूटूथ की मदद से हैक नहीं किया जा सकता। ग्रेफाइट आधारित ट्रांसमीटर की मदद से ही ईवीएम को खोला जा सकता है। इन ट्रांसमीटरों का इस्तेमाल 2014 के चुनाव में भी किया गया था।
– एक्सपर्ट का दावा है कि कोई व्यक्ति ईवीएम के डेटा को मैन्युपुलेट करने के लिए लगातार पिंग कर रहा था। 2014 में बीजेपी के कई नेताओं को इस बारे में जानकारी थी। उसने दावा किया कि जब उन्होंने एक अन्य बीजेपी नेता तक यह बात पहुंचाई तो उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति की हत्या करवा दी गई।
– एक्सपर्ट का दावा है कि ईवीएम हैक करने में रिलायंस कम्युनिकेशन बीजेपी की मदद करती है। एक्सपर्ट का कहना है कि उन्होंने दिल्ली के चुनाव में इस ट्रांसमिशन को रुकवा दिया था इसलिए बीजेपी यह चुनाव हार गई थी। दिल्ली के चुनाव में बीजेपी की आईटी सेल द्वारा किया गया ट्रांसमिशन पकड़ में आ गया था। एक्सपर्ट ने कहा, ‘हमने ट्रांसमिशन को आम आदमी पार्टी के पक्ष में कर दिया था। वास्तविक नतीजे 2009 के जैसे ही थे।’
– एक्सपर्ट ने दावा किया है कि आम आदमी पार्टी ने उनसे संपर्क किया। उनका दावा है कि आम आदमी पार्टी चाहती थी कि वो दुनिया को ईवीएम हैकिंग का डेमो दें। उसने कहा है कि वो अमेरिकी में पॉलिटिकल असाइलम लिया है और उनके पास वो दस्तावेज मौजूद हैं जो उन्होंने अमेरिका को पॉलिटिकल असाइलम के लिए दिया था।
– भारत के निर्वाचन आयोग ने कहा है कि चुनावों में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम हैकप्रूफ है। उन्होंने कहा है कि लंदन में हैकथॉन आयोजित करवाकर आयोग की छवि भूमिल करने की कोशिश की गई है। इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए राय ली जा रही है। आयोग ने फिर से दोहराया है कि भारत की ईवीएम को हैक नहीं किया जा सकता है। इव्हिएम बनाने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडीया के पुर्व सॉफ्टवेयर इंजिनीअर सय्यद सुजा ने आगे बताया
इव्हिएम ब्युटूथ या वायफाय से हैक नही होती.
इव्हिएम का डाटा लो लेव्हल फ्रिक्वेसी रिसेप्टर से पकडा जाता है और उसको बदलकर वापस भेज दिया जाता है.
ऐसा करने के लिये रिलायन्स कम्युनिकेशन्स के जीयो नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है. जिनको मिलिटरी मे इस्तेमाल किया जाने वाला लो लेव्हल फ्रिक्वेसी मोड्युलेटर खरीदने की मंजुरी कॉग्रेस ने २०१२ मे दि थी.
चुनाव आयोग जो हैकींग की प्रतियोगिता आयोजीत करता है दरअसल वह एक धोखागडी है. कुछ खास इव्हिएम जो हैक नही हो सकते उन्हे चुनाव आयोग प्रतियोगिता में रखता है.
इव्हिएम घोटाले की जानकारी स्व. गोपीनाथ मुंडे जी को थी और इसिलिये उनकी हत्या की गई.
२०१४ का लोकसभा चुनाव इव्हिएम हैकींग से जीता गया. जिसकी जानकारी सैय्यद सुजा को थी और इसिलिये उनके १३-१४ साथियों को मौत के घाट उतारा गया था. सुजा अपनी जान बचाकर अमेरिका की शरण मे गये है.
इव्हिएम हैक होता है यह सभी राजनितीक पार्टीयों को अच्छी तरह से पता है. इव्हिएम विरोध का बहाना कर वे भी इव्हिएम हैकींग की लुट में अपना हिस्सा लेना चाहते है. अब आप समझ सकते है इव्हिएम पर राजनितीक पार्टीया चुप्पी साधे क्यो बैठी है.
इव्हिएम के विरोध में जो भी खडा होता है उसको मौत के घाट उतारा जाता है यही सबसे बडा सबुत है की इव्हिएम हैक होती है.
समझ नही आया तो पुछ लिजीये.
#आपकी एकता ??

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