जब तक संविधान जिंदा है ,मैं जिंदा हूं। बस संविधान को मत मरने देना।

“मेरे जाने के बाद यह मत समझना कि में मर गया ,जब तक संविधान जिंदा है ,मैं जिंदा हूं ।बस

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सत्य का साक्षात्कार ,धन्य हुई बैशाख पूर्णिमा।

वैशाख पोर्णिमा की वह मंगलमयी रात धन्य हो उठी ,जबकि उस युवा योगी सिद्धार्थ गौतम ने बोधिवृक्ष के तले अपने

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कामगारांसाठी बाबासाहेबांनी दिलेले योगदान

• डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांनी १५ ऑगस्ट १९३६ ला त्यांनी स्वतंत्र मजूर पक्षाची स्थापना केली. ते अध्यक्ष होते. पक्षाचा जाहीरनामा ‘टाइम्स

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