पंचशील ही आदर्श जीवन का आधार है !

शरीर में जो स्थान ह्रदय का होता है बुध्दिज्म में पंचशील का वही स्थान है |जैसे बिना धडकन के शरीर की कोई उपयोगिता नहीं है वैसे ही पंचशील के बिना बुध्दिज्म निष्प्रयोज्य ही साबित होगा |अतः बुध्दिज्म में प्राण प्रतिष्ठा की स्थापना और उसे गतिशील बनाने के लिए पंचशील का पालन अति आवश्यक है |

पंचशील खुशहाल जीवन का एक ऐसा मंत्र है जिसका चिन्तन, मनन ओर आचरण साधारण व्यक्ति को भी आदर्श व प्रभावशाली बना देता है |

पंचशील कोई पूजा, आराधना या उपासना नही है |यह तो एक आदर्श जीवन जिने की एक आदर्श पध्दति है |इस जीवन शैली को संसार के सभीमनुष्यों पर समान रूप से प्रभाव डालकर एक स्वस्थ व स्वच्छ समाज के निर्माण में पूर्णतया कारगर सिध्द होगी |आवश्यक है बस इसे अपनाने की |
तथागत बुध्द के बताए नियम संसार के सभी मनुष्यों पर समान रुप से प्रभावी हैं |
अपने इन्हीं नियमों की वजह से बुध्दिज्म विश्वव्यापी धम्म और बुध्द विश्व गुरू के रूप में जाने जाते हैं |
पंचशील का पालन करके सभी व्यक्ति सांसारिक बाधाओं से मुक्ति पाकर अपने जीवन को सुखी तथा समृद्ध बना सकते हैं |

पंचशील

1 पाणातिपाता वेरमणी सिक्खापदं समादियामि |
मैं अकारण प्राणी हिंसा न करने की शपथ ग्रहण करता हूँ |

2 अदिन्नादाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि |
मैं बिना पूर्व स्वीकृति के किसी की कोई वस्तु न लेने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ |

3 कामेसुमिच्छाचारा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि |
मैं व्यभिचार न करने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ |

4 मुसावादा वेरमणी सिक्खापदं समादियामि |
मैं झूठ बोलने, बकवास करने, चुगली करने से विरत रहने की शिक्षा लेता हूँ |

5 सुरामेरयमज्ज पमादठ्ठाना वेरमणी सिक्खापदं समादियामि |
मैं कच्ची व पक्की शराब, मादक द्रव्यों के सेवन, प्रमाद के स्थान (जुआंघर आदि) से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ |

नमोबुध्दाय 🙏 🌷
सप्रेम जय भीम 🙏 🌹
जय प्रबुध्द भारत 🙏 🌷