मंगल धर्म: भगवान ने मंगल पथ की 38 मंजिले बतायी !

1मूर्खों की संगति ना करना !

2बुद्धिमानों की संगति करना ॥

3 शीलवानो की संगति करना ॥

4 अनुकूल स्थानों में निवास करना ॥

5 कुशल कर्मों का संचय करना ॥

6 कुशल कर्मों में लग जाना ॥

7 अधिकतम ज्ञान का संचय करना ॥

8 तकनीकी विद्या अर्थात शिल्प सीखना ॥

9 व्यवहार कुशल एवं विनम्र होना ॥

10 विवेकवान होना ॥

11 सुंदर वक्ता होना ॥

12 माता पिता की सेवा करना ॥

13 पुत्र स्त्री का पालन पोषण करना 

14 अकुशल कर्मों को ना करना ॥

15 बिना किसी अपेक्षाके दान देना ॥

16 धम्म का आचरण करना ॥

17 सगे सम्बंधियों का आदर सत्कार करना ॥

18 कल्याणकारी कार्य करना ॥

19 मन, शरीर तथा वचन से परपीड़क कार्य ना करना ॥

20 नशीली पदार्थों का सेवन ना करना ॥

21 धम्म के कार्यों में तत्पर रहना ॥

22 गौरवशाली व्यक्तित्व बनाए रखना ॥

23 विनम्रता बनाए रखना ॥

24 पूर्ण रूप से संतुष्ट होना अर्थात तृप्त होना ॥

25 कृतज्ञता कायम रखना ॥

26 समय समय पर धम्म चर्चा करना ।।

27 क्षमाशील होना ॥

28 आज्ञाकारी होना ॥

29 भिक्षुओ, शीलवान लोगों का दर्शन करना ॥

30 मन को एकाग्र करना ॥

31 मन को निर्मल करना ॥

32 सतत जागरूकता बनाए रखना ।।

33 पाँच शीलों का पालन करना ॥

34 चार आर्य सत्यों का दर्शन करना ।।

35आर्य अाष्टांगिक मार्ग पर चलना ॥

36 निर्वाण का साक्षात्कार करना ॥

37 लोक धम्म लाभ हानि ,यश अपयश ,सुख दुख ,जय पराजय से विचलित ना होना ॥

38 शोक रहित ,निर्मल एवम निर्भय होना ॥

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